आज इस बांध की दीवारें कमजोर पड़ रही हैं और पानी के दबाव के कारण झुक रही हैं। यहीं से ब्यास के पानी को डायवर्ट किया गया है टनल्स के थ्रू जो पहले सुंदरनगर लाया गया। तो यह जो पानी इधर से आ रहा है यह पानी है ब्यास रिवर का और इधर से जो पानी आ रहा है यह सतलुज रिवर का पानी आ रहा है और इसीलिए अब पंडो डैम का लेवल राइज कर रहा है और स्पिलवे गेट के थ्रू इस पानी को कभी भी छोड़ा जा सकता है। हमीरपुर है, नादौन है, कांगड़ा के जो भी इलाके हैं तो वहां पे यह पानी तबाही कर सकता है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भाखड़ा बांध को टेंपल ऑफ मॉडर्न इंडिया के नाम से संबोधित किया
और यह डैम बेहतरीन मार्वलस इंजीनियरिंग का एग्जांपल सेट करते हुए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तक के किसानों में खुशहाली ले आया। पर आज इस बांध की दीवारें कमजोर पड़ रही हैं और पानी के दबाव के कारण झुक रही हैं और हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर, नादौन, कांगड़ा जैसे इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। तो आखिरकार यह किस तरह से हुआ? क्यों इस डैम की दीवारें कमजोर पड़ रही हैं पानी के दबाव के आगे? तो आओ समझते हैं। तो सबसे पहले हमें समझना पड़ेगा कि किस तरह से यह सब चीजें हुई। तो यहां पर एक खबर आती है कि पानी के दबाव की वजह से झुका भाखड़ा बांध खतरा बढ़ता देख डहर पावर हाउस किया बंद और यहीं पे बीबीएमबी के एक सदस्य हैं जिन्होंने एक स्टेटमेंट जारी की कि पानी के अत्यधिक दबाव से बांध में 1 डिग्री से अधिक झुकाव आ गया है। 1 डिग्री तक का झुकाव सामान्य माना जाता है।
तकनीकी कमेटी ने ऐसा निर्णय लिया है। मैं इससे अधिक कुछ नहीं बता पाऊंगा। तो आखिरकार यहां पर यह चिंताजनक सवाल भी बनता है कि आखिरकार जिस तरह से अब हाल ही में डहर पावर हाउस को बंद किया गया क्योंकि यह इतिहास में पहली बार हो रहा है कि 15 दिन के लिए डहर पावर हाउस को बंद कर दिया गया है। तो आओ समझते हैं अब हम। तो सबसे पहले हमें समझना पड़ेगा भाखड़ा बांध है कहां पे और क्या-क्या चीजें इसके साथ जुड़ी हुई हैं। तो अगर हम भाखड़ा बांध की बात करें तो भाखड़ा बांध बेसिकली एक कंक्रीट ग्रेविटी डैम है जिसकी हाइट 225.55 मीटर आपको देखने को मिल जाएगी। और यह जो डैम है पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर के ऊपर आपको देखने को मिलता है। और
अगर मैं इसकी लोकेशन की बात करूंगा तो यह जो लोकेशन बेसिकली भाखड़ा जो विलेज है वो वहां पे बिलासपुर जिले के हिमाचल प्रदेश में आपको देखने को मिलता है और वहीं पे जो सतलुज रिवर है एक गॉर्ज बनाती है जिसके ऊपर ही यह बांध बना है। इसके बाद अगर हम भाखड़ा बांध के पावर कैपेसिटी की बात करें तो यहां पे जो सतलुज नदी बहती हुई आ रही है इसका यह जो राइट विंग हिस्सा है इस हिस्से को हम राइट विंग के नाम से जानते हैं या राइट बैंक पावर हाउस के नाम से जानते हैं। तो इसकी जो कैपेसिटी आपको देखने को मिलेगी वो मिलेगी 785 मेगावाट। जबकि इस तरफ अगर मैं बात करूंगा तो यह वाला जो हिस्सा है यह लेफ्ट बैंक पावर हाउस की अगर हम बात करेंगे तो इसकी कैपेसिटी आपको देखने को मिलेगी 630 मेगावाट। तो ये तो है एक बेसिक इंफॉर्मेशन जो हमें यहां पे पता होनी चाहिए। बट यहां पे बात हो रही है कि इसके स्ट्रक्चर के अंदर कहीं ना कहीं हमें झुकाव देखने को मिल रहा है पानी के दबाव की वजह से। तो हमें सबसे पहले इसके स्ट्रक्चर को समझना पड़ेगा। अगर आप ध्यान से देखेंगे तो यह जो यह हिस्सा आप सामने से देख रहे हैं, दिस इज योर फ्रंट व्यू। यह है हमारा फ्रंट व्यू। और यह जो ऊपर का हिस्सा है, यह जो हम ऊपर के हिस्से की बात कर रहे हैं, इस हिस्से को हम बोल रहे हैं दिस इज योर टॉप व्यू।
अब यह फ्रंट व्यू, यह टॉप व्यू। अब इसके साथ इसका जो बैक साइड है, अब जब यहां पे सतलुज के पानी को इस गर्ज के पास डैम बना के रोका गया, तो पीछे एक बहुत बड़ा जलाशय बना जिसको हमने क्या कहा? गोविंद सागर लेक के नाम से हम इसको जानते हैं। तो यह जो लेक बनी इसका नाम था गोविंद सागर लेक या फिर गोविंद सागर रिजवायर। और अगर हम बात करें इस गोविंद सागर लेक की तो यह दो जिलों में आपको देखने को मिलेगी हिमाचल प्रदेश की जिसमें कि मैक्सिमम पार्ट इसका बिलासपुर जिले में और उसका कुछ कम पार्ट जो है आपको उन जिले के अंदर देखने को मिलता है। अब यहां पे इसी डिजाइन के थ्रू हम समझेंगे। सेटेलाइट इमेज के थ्रू समझेंगे कि किस तरह से यहां पे ये सब चीजें हमें देखने को मिल रही हैं। तो सबसे पहले अगर हम बात करें तो हमने ये वाला हिस्से को जाना था फ्रंट व्यू। दिस इज योर टॉप व्यू। अब जहां पे ये रिजवायर जिस हम लेक की जो हम पीछे अभी देखी हमने तो उसके पीछे का जो हिस्सा है ये है हमारा बैक साइड का व्यू जिसको कि हम इस तरह से देखते हैं।
यहां पे यह वाला जो हिस्सा है दिस इज योर बैक साइड व्यू। अब इस बैक साइड व्यू के ऊपर अगर हम बात करें और उसी सेटेलाइट इमेजरी के थ्रू अगर हम जानेंगे यहां पर कि यह जो पिछला हिस्सा है इसी का तो यहीं पे आप एक चीज देखेंगे कि यहां पे जब ये पानी रुका तो इस पानी ने इस बांध की दीवारों पे भी तो दबाव डाला होगा। तो इसी पानी की वजह से जो बांध की दीवारों पे जो दबाव पड़ रहा है उसी को हम क्या बोल देते हैं? उसी को बोलते हैं हम हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर। क्या बोलते हैं? हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर के नाम से हम जानते हैं। और यह एक बहुत सिंपल सी चीज है कि जब भी हम किसी भी फ्लूइड या लिक्विड के अंदर जैसे ही हम नीचे जाते हैं तो वहां पे हमें मैक्सिमम प्रेशर देखने को मिलता है। इस चीज को अब हम यहां पर समझेंगे। और एक चीज आप याद रखेंगे। कि यहीं कहीं आपको डेंजर मार्क भी देखने को मिलता है डैम के ऊपर जो कि भाखड़ा के अंदर जो डेंजर मार्क है जो कि 1680 फीट यहां पे रखा गया कि इसके अधिक अगर पानी होगा तो भाखड़ा जो है अपने गेट्स को ऊपर करेगा और पानी एक्सेस पानी को निकाल देगा। अब यहीं पर इस कांसेप्ट से समझते हैं कि हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर काम कैसे करता है और क्या चीजें इसके अंदर इनवॉल्व होती हैं। सपोज़ करते हैं कि यहां पे एक ये कोई कंक्रीट का कॉलम है जिसके अंदर पानी भरा हुआ है। यहां पे यह ब्लू कलर से मैं पानी रिप्रेजेंट कर रहा हूं। और जैसा कि हमने कहा कि जैसे ही हम किसी भी फ्लूइड के अंदर नीचे की तरफ जाएंगे तो हमें क्या देखने को मिलेगा? प्रेशर इनक्रीस होता हुआ देखने को मिलता है। अब सेम केस को हम
यहां पे अप्लाई करते हैं जो कि हमने अभी पीछे भी देखा और सपोज़ करो कि ये भाखड़ा डैम की ही वॉल्स आपको देखने को लग रही हैं। अब यहां पे धीरे-धीरे मैं पानी इंट्रोड्यूस कर रहा हूं यहां पे। अब आप एक चीज़ यहां पे ध्यान से ऑब्ज़र्व करेंगे। इस स्ट्रक्चर और यह मान लो स्ट्रक्चर वन है और यह रहा आपका स्ट्रक्चर टू। अब स्ट्रक्चर वन और स्ट्रक्चर टू में एक चीज का आप डिफरेंस देख रहे होंगे कि यहां पे आपको एक कॉमन ही सिंगल थिकनेस देखने को मिल रही है स्ट्रक्चर टू के अंदर। जबकि जो स्ट्रक्चर वन है जहां पे आप देख रहे होंगे कि इसके बॉटम में जो थिकनेस है वो ज्यादा है और ऊपर कम है। तो यही कारण है कि जब भी कोई भी डैम का डिजाइन होता है कि उसका बॉटम को हमेशा थिक रखा जाता है एज कंपैरिजन टू इट्स टॉप। क्यों? क्योंकि सबसे ज्यादा पानी का जो प्रेशर होगा वो जो बॉटम की लेयर्स होती हैं कंक्रीट की वही झेलती हैं। इसलिए उनकी थिकनेस हमें ज्यादा देखने को मिलती है। तो आपको समझ आ गया होगा क्यों? किसी डैम लाइक स्ट्रक्चर के अंदर आपको उसका जो निचला बेस है वो काफी थिक देखने को मिलता है एज कंपैरिजन टू इट्स टॉप। तो ये चीज आपको क्लियर हो गई होगी यहां पे। अब चलते हैं हम आगे। जब हम इसी स्ट्रक्चर की बात कर रहे हैं तो इस स्ट्रक्चर की स्टेबिलिटी की
जब हम बात करेंगे तो वो दो चीजों पर टिकी होती है। वो चीजें कौन-कौन सी हैं? वो है आपकी डिफ्लेक्शन और रिफ्लेक्शन। अब इसी चीज को हमने समझना है यहां पर कि डिफ्लेक्शन और रिफ्लेक्शन किस तरह से डैम की स्टेबिलिटी में काम करती हैं और किस तरह से यह हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर को आगे चल के जन्म देती हैं और वही आगे पूरे डैम के स्ट्रक्चर की स्टेबिलिटी डिफाइन करता है। तो अगर हम यहां पर बात करेंगे डिफ्लेक्शन के और रिफ्लेक्शन की तो डिफ्लेक्शन का सिंपली मतलब होता है कोई भी मेजरेबल फिजिकल मूवमेंट या फिर डिफेशन जो आ रही है उस डैम के स्ट्रक्चर में किसकी वजह से पानी के प्रेशर या फिर कोई भी अगर आपको टेंपरेचर चेंज देखने को मिल रहा है। तो अब इसको हम यहीं पर समझ लेते हैं कि यहां पर अगर मैं बात करूंगा सपोज़ करते हैं यहां पे इसी डायग्राम के ऊपर कि मान लो यह पानी धीरे-धीरे एंटर किया इस स्ट्रक्चर के अंदर डैम के अंदर तो अब जब यह पानी एंटर किया तो यह पानी क्या करेगा? दबाव डालेगा। तो इस दबाव की वजह से जो इसके अंदर डिफेशन आपको दे सॉरी डिफेशन आपको देखने को जो मिलेगी या फिर इसके फिजिकल स्ट्रक्चर में जो चेंज देखने को मिलेगा इसी को मैंने क्या बोल दिया? इसी को मैंने बोल दिया डिफ्लेक्शन। अब यह ऑब्वियस सी बात है कि जब यहां पे पानी एंटर करेगा या पानी जब आएगा पीछे से और डैम की दीवारों से टकराएगा तो उसकी वजह से कुछ ना कुछ डिफेशन तो देखने को मिलेगी। और उस डिफेशन की वजह से जब पानी का प्रेशर आया और ये जो डिफेशन हुई जिसको हमने कहा कि डिफ्लेक्शन हुई। अब यहां पे ये डिफ्लेक्शन को बैलेंस करने के लिए एक और फिनोमिना आपको देखने को मिलेगा जिसको हम बोलेंगे रिफ्लेक्शन। अब पानी के थपड़ों दीवार से टकराए। अब वो बाउंस बैक हो के भी तो वापस जाएंगे। तो जो बाउंस बैक हो के जब वो वापस जा रहे हैं तो उसी को हमने क्या बोल दिया? रिफ्लेक्शन बोल दिया। अब वही चीज हमें यहां पे बात करते हैं कि रिफ्लेक्शन टिपिकली रिलेट्स टू हाउ सिस्मिक वेव्स इंटैक्ट विद द विद द डैम एंड इट्स फाउंडेशन कॉजिंग दी वेव्स टू बाउंस बैक। जनरली ये जो रिफ्लेक्शन टर्म है ये जब भी कोई भी सिस्मिक वेव खास करके अगर मैं अर्थक्वेक की बात करूं तो वो किस तरह से डैम के स्ट्रक्चर से जो उसके फाउंडेशन से टकरा के बाउंस बैक हो के जाती हैं उसी को हम क्या बोल देते हैं? रिफ्लेक्शन बोल देते हैं। और जब भी
यह पानी की वेव्स टकरा के बाउंस बैक जाएंगी तो वह भी रिफ्लेक्शन की कैटेगरी के अंदर ही हमें देखने को मिलता है। इट मींस कि जब डिफ्लेक्शन और रिफ्लेक्शन के बीच में एक इक्विलिब्रियम हमें देखने को मिलेगा तभी वो डैम का स्ट्रक्चर या डैम जैसा जो स्ट्रक्चर होगा वो इस हाइड्रोस्टेटिक प्रेशर को झेल पाएगा और स्टेबल रहेगा। तो यहीं पे जो डिफ्लेक्शन है यह बेसिकली एक की इंडिकेटर होता है डैम की हेल्थ का मॉनिटरिंग टू इंश्योर स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी और इसी की मॉनिटरिंग से हम उस स्ट्रक्चर की कितनी स्टेबिलिटी है वो हम एश्योर कर पाते हैं। जबकि जो आपका सिस्मिक रिफ्लेक्शन है ये इंपॉर्टेंट फैक्टर है। किस चीज को जानने में हमारा हेल्प करेगा कि डैम जब अर्थक्वेक आएगा तो किस तरह से वो बिहेव करेगा या उसकी फाउंडेशन किस तरह से बिहेव करेगी। तो इट मींस डिफ्लेक्शन और रिफ्लेक्शन दोनों ही इंपॉर्टेंट कॉमोनेंट हैं डैम की सेफ्टी के लिए जहां से हम डैम की स्टेबिलिटी को मेजर करते हैं। अब जैसा कि हमने स्टेटमेंट में पढ़ा कि ये डिफ्लेक्शन 1 डिग्री तक नॉर्मल होता है कि नॉर्मल जब पानी का एंटर करता है पानी टकराएगा डैम की दीवारों से तो उसके अंदर डिफेशन
आना कॉमन चीज है। और वो जो डिफेशन है वह 1 डिग्री तक सामान्य ही कंसीडर की जाती है। पर अब हाल ही में जो डिफ्लेक्शन है भाखड़ा बांध के अंदर वो है 1 डिग्री से ज्यादा आ गई है। इसलिए डैम की स्टेबिलिटी और सेफ्टी के लिए हमें यहां पे जो डहर पावर हाउस है उसको हमें बंद करना पड़ा। तो अब समझेंगे कि वो डेर पावर हाउस क्यों बंद हुआ यहां पे। तो अगर हम यहां पे बात करें तो हमें डहर पावर हाउस समझने से पहले हमें पंडोर डैम को समझना पड़ेगा। तो चलते हैं पंडोर डैम की तरफ। तो अगर आप यहां पर देखेंगे तो पंडोर डैम की अगर मैं बात करूंगा तो दिस इज योर व्यास रिवर और यहीं से ब्यास रिवर आगे पंडोर डैम से क्रॉस करते हुए आगे निकल रही है और यहीं पे इसी पंडोर डैम के पास एक टनल पॉइंट वन आपको देखने को यहां पे मिल रहा है वो है ये अब यहीं से ब्यास के पानी को डायवर्ट किया गया है टनल्स के थ्रू जो पहले सुंदरनगर लाया गया और फिर सुंदरनगर से दोबारा से ओपन चैनल्स सुंदरनगर में बीच में यहां से कुछ अंडर अंडरग्राउंड देन उसके बाद जो आपको ओपन चैनल वहां पे लेक देखने को मिल रही है सुंदरनगर लेक वहां पे भी आपको देखने को मिल जाएगा कैनाल्स हैं देन वहां दोबारा से पानी को अंडरग्राउंड लाके डहर पावर हाउस के अंदर फेंका गया है तो जहां पे आप देखेंगे कि वहीं पे आर्टिफिशियल वे के अंदर आपका सतलुज और ब्यास का लिंक आपको देखने को मिल रहा है। तो बेसिकली अगर हम यहां पर बात कर रहे हैं पंडोबग्गी टनल जो कि एक मेजर कॉमोनेंट है ब्यास सतलुज लिंक प्रोजेक्ट का हिमाचल प्रदेश में और उसको डिजाइन ही इसलिए किया गया है टू कैरी वाटर फ्रॉम पंडो डैम ऑन दी ब्यास रिवर टू दी सतलुज रिवर बेसिन फॉर पावर जनरेशन एंड इरीगेशन क्योंकि जनरली 506 के दशक के अंदर आपको देखने को मिला भाखड़ा डैम और उसके बाद नियरली अगर मैं बात करूं 70 के दशक के आसपास आपको देखने को मिलेगा पंडोवा डैम तो ताकि भाखड़ा डैम में प्रॉपर वाटर वाटर सप्लाई रहे इसलिए और इलेक्ट्रिसिटी जनरेट कांस्टेंट होता रहे। तो इसलिए यहां से इस पानी को उठाया गया इस टनल्स के थ्रू और जाके डहर पावर हाउस में फेंका गया जो
बाद में चल के सतलुज में मिल रहा है वो पानी। तो आओ देख लेते हैं यहां पे। यह है आपका दिस इज योर डेहर पावर हाउस। क्लियर? सलापड़ के आसपास आपको देखने को मिल जाएगा यह। और यहीं पर आप यह देखेंगे कि यहां पे इसी के अंदर अगर हम मैं यहां पर बात करूंगा तो यह जो पानी इधर से आ रहा है यह पानी है ब्यास रिवर का और इधर से जो पानी आ रहा है क्योंकि इसके पीछे कोल्ड डैम आपको देखने को मिल जाएगा तो यह पानी जो आ रहा है ये सतलुज रिवर का पानी आ रहा है और यहां आके यह मिक्सिंग आपको देखने को मिल जाती है और यहीं से यह पानी आगे चल के जो है भाखड़ा डैम के अंदर जाता है और जहां भी इलेक्ट्रिसिटी और इरीगेशन पर्पस के यूटिलाइज होता है। अब जैसा कि आप यहां पे देखेंगे इस इमेजरी के थ्रू कि जो डेंजर वाटर लेवल मार्क आपको देखने को मिलता है वह क्या है? 1680 फीट देखने को मिल रहा। और करेंटली इस टाइम पे जो वाटर मार्क चल रहा है भाखड़ा के अंदर वो क्या है? 1673.24 फीट। मतलब नियरली अगर मैं बात करूं तो एप्रोक्समेटली 7 फीट की ही कमी बची है। और उसके बाद वह दोबारा से डेंजर मार्क को टच कर जाएगा। और रिसेंटली
अगर हम बात भी करें अभी तो पिछले कुछ पिछले कुछ महीनों के अंदर खास करके मसून के टाइम पे यह जो वाटर मार्क था यह इसको टच कर गया था भाखड़ा के तो इट मींस एक्सेस में पानी आने की वजह से भी जो डिफ्लेक्शन होना था वो लाजमी ही था तो इसलिए डिफ्लेक्शन उस टाइम पे भी ज्यादा हुआ और साथ में अभी भी इस टाइम पे यह वाटर लेवल आपको देखने को मिल रहा है और रिसेंटली उस जब डैम में जब एक्सेस में मसून में पानी आया तो आगे जब पानी को छोड़ा भी गया तो वहां पर क्या हुआ कि जो पंजाब की नहरे थी तो उनके अंदर भी कुछ ना कुछ स्ट्रक्चरल चेंजज़ आए जिस वजह से कुछ नहरे जो थी टूट भी गई। तो इसलिए वहां पे नहर के मरम्मत कार्यों के लिए अब भाखड़ा डैम से पानी जो है रोका जा रहा है। तो जिस वजह से अब यहां पे पानी का लेवल दोबारा से राइज कर रहा है। और दूसरा सबसे बड़ा फैक्टर क्या है कि इस टाइम पे जिस हिसाब से अगर हम बात करें तो वाटर मार्क एट प्रेजेंट 7 फीट ही कम रह गया दोबारा से डेंजर मार्क को टच करने से। तो इसलिए अब पानी को निकालना जरूरी हो गया है। तो अब पानी को किस तरह से निकाला जाएगा कि सबसे पहले तो डहर पावर हाउस को जो टनल के थ्रू पीछे पंडो से पानी आ रहा है ताकि उसको रोका जाए। पावर हाउस को शट किया जाए 15 दिनों के लिए। क्योंकि जब पावर हाउस शट होगा तो टरबाइन नहीं चलेंगे। टरबाइन नहीं चलने का मतलब साफ-साफ है कि वहां पानी आएगा ही नहीं। और इसीलिए जो टारगेट रखा गया है कि 1650 फीट जब पानी आ जाएगा तब जाकर फिर से सिचुएशन को दोबारा
से नॉर्मलाइज किया जाएगा। अब जिस वजह से ऑब्वियस सी बात है कि जब वहां पे पर्टिकुलरली जो डहर पावर हाउस में जब पानी नहीं आएगा तो इट मींस उस टनल के थ्रू भी पानी नहीं आएगा जो हम बात कर रहे हैं इस टनल की। तो अब जब इस टनल में पानी नहीं आएगा तो दिखती सी बात है कि पंडोर डैम का लेवल क्या होगा? राइज करेगा। और जब इस पंडोर डैम का लेवल राइज करेगा तो डैम के अंदर एक स्पिलवे गेट होता है कि जब एक्सेस में पानी आ जाए तो स्पिलवे गेट के थ्रू निकाल देते हैं। तो इसीलिए अब पंडोर डैम का लेवल राइज कर रहा है और स्पिलवे गेट के थ्रू इस पानी को कभी भी छोड़ा जा सकता है। और जब यह ब्यास के अंदर पानी जाएगा तो प्याज के जो भी लो लाइन इलाके हैं जैसे कि आपका हमीरपुर है, नादौन है, कांगड़ा के जो भी इलाके हैं तो वहां पे यह पानी तबाही कर सकता है। इसलिए यह अलर्ट जारी किया गया है ताकि लोगों की सेफ्टी और सिक्योरिटी है और साथ में उनको जो लाइवलीहुड है और उसके साथ अगर मैं कहूं जो भी जानी माली नुकसान को बचाया जा सके इसलिए यह अलर्ट जारी किया गया है। तो आई होप यहां तक आपको चीजें क्लियर हो गई होंगी कि क्यों किस तरह से इस तरह ये अलर्ट जारी किया और इसके साथ कुछ सिविल स्टेप के पेड इनिशिएटिव्स हैं जिन पे आप जानकारी आप जो है सिविलst की ऐप के थ्रू और कॉल करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।